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परिचय

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"भारत में आधुनिक वन अग्नि नियंत्रण विधियों की शुरुआत " नामक केंद्रीय प्रायोजित स्कीम 1992-93 में आरम्भ की गई थी, जो निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ, क्रियान्वित की जा रही है: 

 

  1. प्राकृतिक एवं मानव निर्मित वन, दोनों की रक्षा और सुरक्षा की दृष्टि से वन की आग नियंत्रित करना ।
  2. वन में आग लगने की घटनाओं और उनकी व्यापकता में कमी लाकर वन की उत्पादकता को बेहतर बनाना ।
  3. वन की आग से बचाव, पहचान और और रोक लगाने के सिद्धांतों और तकनीकों का उपाय, परीक्षण और प्रदर्शन करना । 
  4. कर्मियों को वन अग्नि प्रबंधन में भागीदारी हेतु तैयार करने के लिए डिज़ाइन किए गए प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से अनुकूलन एवं प्रशिक्षण देना ।

 

इस योजना के अंतर्गत राज्यों को निम्नलिखित वस्तुओं के लिए शत-प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है : 

 

  1. हस्त उपकरण 
  2. अग्निरोधक वस्त्र 
  3. वायरलेस के संचार सेट 
  4. आग का पता लगाने वाले उपकरण 
  5. अग्निशामक 
  6. अग्नि रेखाओं का निर्माण 
  7. वॉच टॉवरों का निर्माण 
  8. प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन 
  9. अनुसंधान एवं प्रचार-प्रसार 

यह योजना ग्यारह चयनित राज्यों अर्थात्, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु में कार्यान्वित की जा रही है ।

 

बाद में स्कीम को साझाकरण आधार पर उत्तर पूर्वी (90:10) और विशेष श्रेणी वाले राज्यों (75:25) सहित संपूर्ण देश में लागू किया गया ।

 

  1. 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, स्कीम को "वन प्रबंधन में तेजी लाना" के रूप में नवीनीकृत किया गया ।
  2. मौजूदा एकीकृत वन प्रक्षेपण योजना (आईएफएस) के अलावा, नए घटक भी जोड़े गए हैं :-

 

  1. सभी नए घटक शत-प्रतिशत केंद्र द्वारा प्रायोजित हैं ।
  2. आईएफएमएस पर संशोधित दिशानिर्देशों पर सीसीईए स्वीकृति लंबित है ।